रेगिस्तान का सफ़र और रहस्यमयी शहर Desert trip and mysterious city
शुरुवात से अंत तक जरूर पढ़ें।
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भूमिका
रेगिस्तान… जहां दिन का सूरज आग उगलता है और रातें मौत-सी ठंडी होती हैं। यहां जीवन मुश्किल है, लेकिन कहानियाँ और रहस्य कभी खत्म नहीं होते। दुनिया के हर रेगिस्तान में कुछ ऐसे किस्से दबे होते हैं जो इंसानी समझ से परे हैं। यही एक कहानी है चार दोस्तों की, जिन्होंने एक ऐसे रेगिस्तान की यात्रा की जहाँ उन्हें एक ऐसा शहर मिला, जो सदियों से रेत में दबा था। यह सिर्फ़ खंडहरों का शहर नहीं था, बल्कि उस शहर में कुछ जीवित भी था—कुछ ऐसा, जो इंसान नहीं था।
पहला अध्याय : सफ़र की शुरुआत
अर्जुन, आयुष, तान्या और विकास—चार दोस्त। चारों का शौक़ था रोमांच की तलाश। वे अक्सर नई जगहों पर जाते, अजीब-अजीब जगहों की खोज करते और कैमरे में कैद करते।
एक दिन अर्जुन ने किताबों की लाइब्रेरी से एक पुरानी डायरी निकाली। उस डायरी में एक नक्शा बना था। नक्शे के नीचे लिखा था—
“रेत के दिल में छुपा शहर, जहां सोने की गलियाँ हैं और मौत की परछाइयाँ भी।”
अर्जुन ने अपने दोस्तों को वह नक्शा दिखाया। तान्या, जो हमेशा रहस्यमयी कहानियों में विश्वास करती थी, तुरंत बोली—
“ये नक्शा नकली भी हो सकता है, लेकिन अगर सच हुआ तो सोचो! एक ऐसा शहर, जो रेत में दबा हुआ है, जहां खजाना है।”
विकास हंसा—“या फिर वहां सिर्फ़ ऊँट और सूखी हड्डियाँ होंगी।”
लेकिन चारों के रोमांचप्रिय दिल ने फैसला कर लिया—उन्हें इस नक्शे के पीछे जाना ही है।
दूसरा अध्याय : रेगिस्तान की आग
वे चारों राजस्थान के एक गाँव पहुँचे, जहां से रेगिस्तान शुरू होता था। गांव वालों से जब उन्होंने नक्शे की दिशा पूछी, तो बूढ़े लोग काँप गए।
एक बूढ़ा आदमी बोला—
“उस तरफ़ मत जाओ… वो इलाका श्रापित है। कई लोग गए, लेकिन लौटकर कोई नहीं आया।”
अर्जुन मुस्कुराया—“लेकिन हम चार हैं। हम लौट आएंगे।”
बूढ़े ने एक आखिरी बात कही—
“अगर शहर मिल भी जाए, तो कभी सूरज ढलने के बाद वहां मत रुकना। रात में वो शहर जीवित हो जाता है।”
बात डरावनी थी, लेकिन दोस्तों ने परवाह नहीं की।
उन्होंने ऊँटों और पानी का इंतज़ाम किया और निकल पड़े।
रेगिस्तान में चलते-चलते तीन दिन हो गए। दिन का सूरज उनके सिर पर आग बरसाता और रात की ठंडी हवाएँ शरीर काट डालतीं। रेत के तूफ़ान से आँखें जल उठीं।
तान्या अक्सर कहती—“मुझे लगता है कोई हमें देख रहा है।”
लेकिन अर्जुन और आयुष मज़ाक उड़ाते—“ये तेरी आदत है, हर जगह भूत देख लेती है।”
तीसरा अध्याय : पहला संकेत
चौथे दिन उन्हें रेत में आधा दबा एक विशाल दरवाज़ा मिला। दरवाज़े पर अजीब-अजीब चिन्ह बने थे, जो किसी प्राचीन भाषा में लिखे लगते थे।
विकास ने दरवाज़े को छुआ तो अचानक उसकी उंगलियाँ जल गईं।
“आह्ह!” उसने हाथ खींच लिया।
दरवाज़ा गर्म था, जैसे किसी आग के बीच से निकाला गया हो।
आयुष ने कहा—“ये दरवाज़ा किसी खंडहर शहर का होगा। हमें अंदर चलना चाहिए।”
चारों ने मिलकर दरवाज़े के आसपास की रेत हटाई और धीरे-धीरे दरवाज़ा खुल गया।
अंदर अंधेरा था, लेकिन जैसे ही वे आगे बढ़े, सामने उन्हें एक विशाल शहर दिखाई दिया।
चौथा अध्याय : रहस्यमयी शहर
शहर अद्भुत था। ऊँची-ऊँची दीवारें, पत्थरों से बनी गलियाँ, और इमारतें जो आधी रेत में दबी थीं।
लेकिन सबसे अजीब बात यह थी कि वहां शांति बहुत गहरी थी। न हवा की आवाज़, न किसी पक्षी की, न ही रेत की सरसराहट।
तान्या ने कैमरा निकाला और तस्वीरें लेने लगी।
विकास बोला—“अरे वाह, देखो तो, ये मूर्तियाँ कितनी असली लग रही हैं।”
शहर के बीचोंबीच उन्हें एक मंदिर जैसा स्थान मिला। मंदिर के दरवाज़े पर लिखा था—
“यहाँ सोने से अधिक मौत है। प्रवेश करने वाला लौटकर नहीं जाएगा।”
अर्जुन ने पढ़कर कहा—“ये सिर्फ़ डराने के लिए लिखा है। हमें अंदर चलना चाहिए।”
पाँचवाँ अध्याय : अंधेरे की आहट
मंदिर के अंदर उन्होंने देखा—दीवारों पर हजारों हाथों के निशान थे, जैसे लोगों ने भागते-भागते दीवार पर हाथ मारा हो।
बीच में एक विशाल पत्थर का तख्त रखा था, जिस पर एक सुनहरी ताज रखा था।
आयुष दौड़कर बोला—“ये तो असली सोना है!”
उसने हाथ बढ़ाया ही था कि अचानक मंदिर की दीवारें काँपने लगीं।
तान्या चीख पड़ी—“रुको! इसे मत छुओ!”
लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
ताज के चारों ओर अंधेरा घूमने लगा, और मूर्तियाँ धीरे-धीरे हिलने लगीं।
उन मूर्तियों की आँखें लाल चमकने लगीं।
विकास बोला—“ये… ये इंसान नहीं हैं…”
छठा अध्याय : मौत का खेल
मूर्तियाँ जीवित हो गई थीं। वे पत्थर के सैनिक थे, जिनके हाथों में तलवारें थीं। उनकी चाल भारी थी, लेकिन उनकी ताकत भयानक थी।
चारों डरकर भागे। गलियों में अंधेरा फैल गया था।
हर तरफ़ से कदमों की आवाज़ आ रही थी।
अर्जुन बोला—“तेज भागो! अगर हमने यहाँ से निकलने का रास्ता नहीं ढूँढा तो सुबह देखने के लिए जिंदा नहीं रहेंगे।”
वे गलियों में दौड़ते रहे। एक मोड़ पर तान्या फिसल गई। एक सैनिक ने अपनी तलवार उसकी गर्दन पर तान दी।
अर्जुन ने पत्थर उठाकर सैनिक पर फेंका। सैनिक कुछ पल के लिए रुका और वे तान्या को उठाकर भागे।
सातवाँ अध्याय : रहस्य का खुलासा
भागते-भागते वे एक अजीब जगह पहुँचे। वहां जमीन पर एक विशाल गोल घेरा बना था, जिसमें रेत अलग ढंग से चमक रही थी।
वहां एक प्राचीन शिलालेख पड़ा था। अर्जुन ने पढ़ा—
“यह शहर श्रापित है। यहां के लोग लालच में अमरता चाहते थे। लेकिन देवताओं ने उन्हें पत्थर में बदल दिया। जब तक कोई बाहरी इस ताज को छूएगा, ये पत्थर फिर जीवित हो जाएंगे। बचने का एक ही रास्ता है—ताज को वापस उसी जगह रखना।”
चारों ने एक-दूसरे की ओर देखा।
लेकिन समस्या ये थी कि ताज अब आयुष के पास था, और सैनिक हर तरफ़ से घेर रहे थे।
आठवाँ अध्याय : अंतिम संघर्ष
आयुष बोला—“अगर मैं ताज रख दूं तो शायद ये रुक जाएं।”
तान्या चीखी—“लेकिन तब तू बच नहीं पाएगा।”
आयुष ने मुस्कुराते हुए कहा—“शायद यही किस्मत है।”
उसने ताज उठाया और मंदिर की ओर दौड़ पड़ा। सैनिक उसके पीछे भागे। अर्जुन, तान्या और विकास चीखते रहे, लेकिन वे कुछ नहीं कर सके।
आयुष ने ताज तख्त पर रखते ही सैनिक अचानक पत्थर बनकर रुक गए। लेकिन उसी पल एक भारी आवाज़ हुई और पूरा मंदिर ढहने लगा।
अर्जुन, तान्या और विकास किसी तरह बाहर निकल आए, लेकिन आयुष मलबे में दब गया।
नौवाँ अध्याय : रेगिस्तान की खामोशी
सुबह की पहली किरणों के साथ शहर फिर शांत हो गया। मूर्तियाँ जड़ हो गईं, गलियाँ फिर वीरान हो गईं।
अर्जुन, तान्या और विकास ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे जानते थे कि उनका दोस्त अब कभी लौटकर नहीं आएगा।
गाँव लौटकर उन्होंने किसी को उस शहर के बारे में नहीं बताया।
लेकिन तान्या की डायरी में आज भी वह लिखा है—
“रेत के नीचे वो शहर अब भी है। और शायद कोई और पागल इंसान, किसी दिन उस ताज को फिर छू लेगा।”