अनजान द्वीप पर फँसे दोस्त Friends stranded on an unknown island
शुरुवात से अंत तक जरूर पढ़ें।
भाग 1 : तूफ़ान और अनजान किनारा
गर्मी की छुट्टियों का मौसम था। पाँच घनिष्ठ दोस्त — राहुल, आयुषी, विकास, तान्या और समीर — ने सोचा इस बार कुछ अलग किया जाए। रोज़मर्रा की भागदौड़ और नौकरी के तनाव से दूर जाने के लिए उन्होंने समुद्र की क्रूज़ यात्रा चुनी।
क्रूज़ पर पहला ही दिन शानदार था। चारों तरफ़ फैला नीला समुद्र, किनारे पर डूबता हुआ सूरज और हवा में तैरती हँसी-ठिठोली। आयुषी ने कैमरा निकालकर सेल्फी खींची और बोली —
“दोस्तों, ये छुट्टियाँ हमारी ज़िंदगी की सबसे यादगार होने वाली हैं।”
समीर, जो हमेशा मज़ाक और रोमांच का दीवाना था, तुरंत बोला —
“हाँ हाँ, जब तक मैं हूँ, एडवेंचर गारंटी पैक्ड है। तुम्हें डरना बस मत पड़े।”
विकास ने हल्की सी घबराहट में कहा —
“बस तूफान-तूफान न आ जाए, वरना एडवेंचर के चक्कर में डूब मरेंगे।”
सब हँस पड़े।
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था।
रात होते-होते आसमान का रंग बदल गया। काले बादल गरजने लगे, बिजली कड़कने लगी और समुद्र की लहरें उफान मारने लगीं। तेज़ हवाओं ने जहाज़ को हिला डाला।
तान्या ने डरते हुए कहा —
“हे भगवान! ये क्या हो रहा है?”
राहुल ने तुरंत सबको पकड़ने को कहा, जबकि समीर चिल्लाया —
“सब लोग डेक पर आओ, हमें बचने का इंतज़ाम करना होगा!”
जहाज़ हिल रहा था। चीखें गूँज रही थीं। समंदर की लहरें जहाज़ से टकरा रही थीं। उसी अफरातफरी में पाँचों दोस्तों ने एक बड़ी लकड़ी की नाव और तैरते हुए बैरल पकड़ लिए।
कई घंटों तक लहरों से टकराते रहे। तूफ़ान उन्हें निगलने पर आमादा था।
और फिर अंधेरा…
सुबह सूरज की किरणें आँखों पर पड़ीं तो उन्होंने खुद को रेत पर पड़ा पाया। सामने समुद्र, और पीछे घना जंगल।
आयुषी ने थकी आवाज़ में कहा —
“हम… जिंदा हैं?”
विकास ने काँपते हुए कहा —
“लेकिन कहाँ…?”
समीर ने रेत झाड़ते हुए खड़े होकर कहा —
“दोस्तों! स्वागत है… हमारे नए एडवेंचर में। यह है… ‘अनजान द्वीप रिसॉर्ट’। टिकट फ्री, रहना फ्री, खाना जंगल से।”
सब हँस पड़े, लेकिन उनके दिल में डर की लहर दौड़ गई थी। वे किसी अनजान द्वीप पर फँस चुके थे।
भाग 2 : जंगल की चुनौती और रहस्यमयी गुफा
दिन गुजरने लगे। उन्होंने पत्तों और लकड़ियों से एक अस्थायी झोपड़ी बनाई। नारियल से पानी पिया और मछलियाँ पकड़कर पेट भरा।
समीर हमेशा माहौल हल्का कर देता। एक बार जब राहुल ने लकड़ियाँ रगड़कर आग जलाने की कोशिश की और धुआँ फैला, तो समीर हँसते हुए बोला —
“देखो दोस्तों, राहुल ने नया इन्वेंशन कर दिया है — ‘फॉग मशीन’। अब यहाँ पार्टी हो सकती है।”
सब हँसते, मगर असलियत यह थी कि ज़िंदगी आसान नहीं थी।
रात को अजीब आवाज़ें सुनाई देतीं — कभी ढोल की थाप, कभी कोई फुसफुसाहट। कभी-कभी दूर कहीं आग की लपटें दिखाई देतीं।
एक दिन जब वे जंगल की गहराइयों में गए, तो उन्हें बेलों से ढकी एक पुरानी गुफा दिखाई दी। गुफा के बाहर अजीब से चिन्ह बने हुए थे, जो किसी प्राचीन भाषा के प्रतीक लगते थे।
आयुषी ने कहा —
“ये जगह मुझे अजीब लग रही है। हो सकता है यहाँ खतरा हो।”
तान्या भी डर गई और बोली —
“हमें वापस चलना चाहिए।”
लेकिन समीर हँसते हुए बोला —
“तुम दोनों तो हॉरर मूवी में एक्स्ट्रा बन सकती हो। डर-डर के मरोगी और हीरो मैं बनूँगा। चलो दोस्तों, गुफा एक्सप्लोर करते हैं।”
अनिच्छा के बावजूद सब अंदर गए। गुफा अंधेरी थी, मगर दीवारों पर बनी चित्रकारी साफ दिखाई दे रही थी — शिकारी, नावें, अजीब देवताओं की मूर्तियाँ और रस्में।
गुफा के बीचों-बीच एक बड़ा पत्थर रखा था, जिस पर एक नक्शा उकेरा गया था। लगता था ये नक्शा इस द्वीप के रास्ते और किसी गुप्त खजाने या बाहर निकलने के रास्ते का संकेत देता था।
राहुल ने गम्भीरता से कहा —
“शायद यही हमारी मुक्ति की कुंजी है।”
तभी बाहर से आवाज़ें आईं। गुफा की तरफ़ मशालें नज़र आईं। मुखौटे पहने लोग धीरे-धीरे गुफा की ओर आ रहे थे।
भाग 3 : संघर्ष और वापसी
मुखौटे वाले लोग, जो शायद किसी प्राचीन कबीले के वंशज थे, पाँचों को घेर लेते हैं। उनके हाथों में भाले और मशालें थीं।
विकास डर के मारे काँपते हुए बोला —
“अब तो गए काम से…”
आयुषी ने राहुल का हाथ कसकर पकड़ लिया। तान्या की आँखों में आँसू भर आए।
लेकिन समीर अचानक आगे बढ़ा। उसने बिना डरे उनके इशारों की नकल करनी शुरू की, अजीब चेहरे बनाए और नकली नृत्य करने लगा।
उसकी हरकत देखकर कबीले वाले एक-दूसरे की तरफ़ देखने लगे और फिर ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे।
इस मौके का फायदा उठाकर राहुल और तान्या ने पत्थर से बना नक्शा उठा लिया।
विकास ने जल्दी से एक मशाल पकड़ ली।
काफी कोशिशों के बाद वे भाग निकले और समुद्र किनारे पहुँच गए। नक्शे के हिसाब से उन्होंने पेड़ों की लकड़ी और बेलों से एक नाव तैयार की।
समीर नाव बनाते हुए बोला —
“देखो! इंजीनियरिंग की पढ़ाई तो की नहीं, पर फिर भी मैं यहाँ ‘शिपिंग कंपनी’ खोल सकता हूँ।”
आखिरकार सब नाव पर सवार होकर समुद्र में उतर पड़े। लहरें ऊँची थीं, मगर उनके दिलों में उम्मीद की लौ जल रही थी।
दो दिन बाद, दूर एक तटीय शहर दिखाई दिया। वे बच गए थे।
जैसे ही किनारे पर पहुँचे, सबकी आँखों में आँसू थे। आयुषी ने कहा —
“ये अनुभव हमें हमेशा एक-दूसरे से जोड़े रखेगा।”
तान्या बोली —
“डरावना था, मगर मैंने सीखा कि हिम्मत और दोस्ती से बड़ा कोई हथियार नहीं।”
राहुल मुस्कुराया और बोला —
“हम सबने मिलकर मौत को मात दी है।”
और समीर ने ठहाका लगाकर कहा —
“अब अगली छुट्टियों में गोवा चलते हैं। लेकिन अगर वहाँ भी तूफ़ान आ गया, तो सीधा मंगल ग्रह पर कैंपिंग करेंगे।”
सब हँस पड़े।
✨ निष्कर्ष
यह कहानी रोमांच, दोस्ती, डर और हास्य का अद्भुत संगम है। यह बताती है कि जब इंसान मुश्किल हालात में होता है, तो उसकी असली ताक़त दोस्ती और हिम्मत से ही झलकती है।