डूबा हुआ भूतिया जहाज़ sunken ghost ship


डूबा हुआ भूतिया जहाज़ sunken ghost ship

शुरुवात से अंत तक जरूर पढ़ें।


भाग 1 : गहराइयों की पुकार

समुद्र हमेशा से इंसानों को आकर्षित करता रहा है। नीला, शांत दिखने वाला यह विशाल जलसागर अपने अंदर ऐसी कहानियाँ और राज़ छुपाए बैठा है जिनके बारे में आज भी विज्ञान अंधेरे में है। चार दोस्त — आरव, कियारा, राहुल और समीर, बचपन से ही रोमांच और खोजबीन के शौकीन थे। कॉलेज के दिनों में ही उन्होंने स्कूबा डाइविंग सीखी थी। वे हर छुट्टियों में किसी न किसी नए बीच पर जाते और समुद्र की गहराइयों में उतरकर उस रहस्यमयी दुनिया को महसूस करते।

इस बार उन्होंने अंडमान के द्वीपों का चुनाव किया। महीनों पहले से उन्होंने अपनी यात्रा की योजना बनाई थी। वहाँ का समुद्र क्रिस्टल की तरह साफ़ था और दूर-दूर तक फैली मूँगे की चट्टानें किसी स्वर्गिक बगीचे की तरह लगती थीं।

जब वे अंडमान पहुँचे, तो उनके गाइड ने उन्हें समुद्र में एक जगह के बारे में बताया जिसे स्थानीय लोग “शापित जल” कहते थे। वहाँ जाने की मनाही थी क्योंकि कई गोताखोर वहाँ से लौटे ही नहीं।

गाइड ने हँसते हुए कहा –
“वहाँ एक डूबा हुआ जहाज़ है। कहते हैं, उसमें खज़ाना छुपा है लेकिन उसके साथ मौत भी बंधी है। जो भी उसके पास जाता है, लौटकर नहीं आता।”

आरव और राहुल की आँखें चमक उठीं।
“यही तो असली रोमांच है,” राहुल बोला।
लेकिन कियारा और समीर थोड़े हिचके।
“अगर यह सच हुआ तो?” कियारा ने डरते हुए कहा।
आरव ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया –
“कहानी और हक़ीक़त में फर्क होता है। और हम सब अनुभवी स्कूबा डाइवर हैं। हमें डरने की ज़रूरत नहीं।”

काफी बहस के बाद आखिरकार सब तैयार हो गए। उन्होंने तय किया कि वे अगले दिन उस जगह पर गोता लगाएंगे।

अगली सुबह वे पूरी तैयारी के साथ नाव लेकर निकले। आसमान साफ़ था, सूरज की रोशनी लहरों पर चमक रही थी। समुद्र मानो उन्हें अपनी गोद में बुला रहा हो। नाव धीरे-धीरे “शापित जल” की ओर बढ़ रही थी।

जैसे-जैसे वे करीब आते गए, समुद्र का रंग गहरा होता गया। हल्का नीला रंग अब गाढ़े नीले में बदल रहा था। समुद्र की सतह शांत थी लेकिन उसकी गहराई में कुछ रहस्यमयी हलचल थी।

उन्होंने ऑक्सीजन टैंक लगाए, चश्मे पहने और एक-एक करके समुद्र में उतर गए। पानी में उतरते ही उन्हें रंग-बिरंगी मछलियों, मूँगे और समुद्री घासों का अद्भुत संसार दिखाई देने लगा।

लेकिन कुछ देर बाद ही चारों ने देखा कि नीचे अंधेरा बढ़ता जा रहा है। और तभी उन्हें एक विशालकाय परछाईं दिखाई दी।

वह था – डूबा हुआ जहाज़

समुद्र की तलहटी में पड़ा हुआ वह जहाज़ आधा टूटा हुआ था। उसका सिरा कीचड़ और समुद्री घास में दब चुका था। लकड़ी और लोहे का वह ढांचा सदियों पुराना लग रहा था। जहाज़ की खिड़कियों से अंधेरा झाँक रहा था, जैसे कोई भीतर से देख रहा हो।

चारों दोस्त कुछ देर तक उस नज़ारे को देखते रह गए।
कियारा ने हाथ के इशारे से कहा – “यह सचमुच मौजूद है!”

वे धीरे-धीरे जहाज़ के करीब पहुँचे। जहाज़ का दरवाज़ा आधा टूटा हुआ था। राहुल ने टॉर्च निकाली और रोशनी डाली। भीतर अंधेरा और डरावना सन्नाटा था।

जैसे ही वे अंदर घुसे, ठंडी लहरें उनके शरीर से टकराईं। जहाज़ के अंदर टूटी-फूटी कुर्सियाँ, बिखरे सामान और जंग लगे हथियार पड़े थे। सबकुछ मानो वक्त में कैद हो गया था।

अचानक आरव की टॉर्च एक जगह जाकर रुक गई। वहाँ एक लोहे का बड़ा-सा संदूक रखा था।

राहुल ने पास जाकर उसे छूने की कोशिश की, लेकिन उसी वक्त चारों ने महसूस किया कि जहाज़ के अंदर एक अजीब-सी गूँज उठ रही है। मानो कोई फुसफुसाकर कह रहा हो –
“यह तुम्हारा नहीं है… दूर हो जाओ…”

समीर का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। उसने हाथ हिलाकर इशारा किया – “चलो यहाँ से निकलते हैं!”
लेकिन राहुल और आरव अब उस संदूक को खोलने के लिए उत्सुक थे।

और तभी अचानक जहाज़ की दीवार से काले साये जैसी कोई चीज़ फिसलती हुई बाहर आई। वह इंसान जैसी आकृति थी, लेकिन चेहरा धुँधला और आँखें लाल चमकती हुईं।

चारों ने तुरंत पीछे हटने की कोशिश की लेकिन दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया।

समुद्र की गहराई में फँसे हुए, डूबे हुए जहाज़ के अंदर… और सामने था एक भयावह रहस्य

भाग 2 : खज़ाने का श्राप

जहाज़ का दरवाज़ा जैसे किसी अदृश्य ताक़त ने बंद कर दिया हो। चारों दोस्त वहीं रुक गए। उनके दिलों की धड़कनें पानी की गहराई में भी सुनाई देने लगी थीं। सामने वही धुँधली आकृति थी, जिसकी लाल आँखें अंधेरे में भूतिया लालटेन की तरह चमक रही थीं।

कियारा ने काँपते हाथों से इशारा किया – “ये इंसान नहीं है…”
आरव ने तुरंत टॉर्च उस आकृति पर फेंकी। रोशनी लगते ही वह परछाई थोड़ी पीछे हटी लेकिन पूरी तरह गायब नहीं हुई। वह अब जहाज़ के एक टूटी हुई दीवार के सहारे खड़ी थी, जैसे उनकी हर हरकत पर नज़र रख रही हो।

राहुल, जो सबसे ज्यादा खज़ाने के लिए उत्साहित था, फुसफुसाया –
“ये हमें डराना चाहता है, लेकिन असली चीज़ वो संदूक है। हमें उसे खोलना ही होगा।”

समीर ने गुस्से में हाथ हिलाकर कहा –
“क्या तुम पागल हो? देख नहीं रहे? यहाँ कुछ बहुत गलत है। हमें वापस जाना चाहिए।”

लेकिन राहुल की आँखों में लालच साफ़ झलक रहा था। उसने धीरे-धीरे उस लोहे के संदूक की ओर तैरना शुरू किया।

संदूक मोटी जंग से ढका हुआ था। उस पर अजीब-सी नक्काशियाँ बनी थीं, जो देखने में किसी पुराने साम्राज्य की लग रही थीं। ऊपर कुछ प्रतीक थे – त्रिशूल, साँप, और एक ताज।

जब राहुल ने उसे छूने की कोशिश की, तभी पूरी जहाज़ की संरचना हिलने लगी। दीवारों से बुलबुले उठे, और अचानक वही परछाई तेज़ी से राहुल की तरफ़ बढ़ी।

कियारा ने चीखकर बुलबुले छोड़े लेकिन आवाज़ पानी में घुल गई।

आरव ने तुरंत अपनी डाइविंग चाकू निकाली और आकृति की ओर तैरा। उसने उस पर वार किया लेकिन जैसे ही चाकू उसके शरीर को छूता, वह धुंध की तरह बिखर जाती और फिर से किसी और कोने में उभर आती।

“ये… इंसान नहीं है… ये श्राप है!” कियारा ने डरते हुए इशारा किया।

राहुल ने हिम्मत जुटाई और संदूक को जोर से खींचा। आश्चर्यजनक रूप से वह बहुत हल्का निकला, मानो किसी ताक़त ने उसे जानबूझकर वहाँ रखा हो।

संदूक जैसे ही थोड़ा हिला, जहाज़ के फर्श में दरारें पड़ने लगीं। ऊपर से मिट्टी और समुद्री घास के गुच्छे गिरने लगे। पूरे माहौल में गहरी गूँज उठी, जैसे कोई हजारों साल पुरानी आत्मा जाग गई हो।

अचानक संदूक का ढक्कन अपने आप थोड़ा खुल गया और उसमें से सोने के सिक्के और जवाहरात बाहर तैरने लगे। चारों दोस्त दंग रह गए। चमकदार रत्नों की रोशनी समुद्र के अंधेरे में भी सूरज जैसी लग रही थी।

लेकिन उसी पल जहाज़ के अंदर कई और परछाइयाँ जीवित हो उठीं। दर्जनों आकृतियाँ – फटे कपड़े, जंग लगे हथियार और सड़े हुए चेहरे – सब उनकी ओर तैरने लगीं।

“ये… ये तो जहाज़ के नाविक हैं!” आरव ने टॉर्च घुमाते हुए इशारा किया।
उनकी आँखों में गुस्सा और दर्द था, मानो वे कहना चाह रहे हों –
“हमारे खज़ाने को छूने की हिम्मत कैसे की?”

अब हालत बेकाबू हो गई। समीर ने तुरंत इशारा किया कि सबको बाहर निकलना होगा। वे दरवाज़े की ओर तैरे लेकिन वह जंग लगा दरवाज़ा अब एकदम बंद था।

पीछे से वे भूतिया नाविक पास आते जा रहे थे। उनके हाथ लंबे, हड्डी जैसे और ठंडे थे।

राहुल ने हार नहीं मानी। उसने संदूक को पकड़ लिया और जोर से खींचकर अपने साथ ले जाने की कोशिश की। तभी एक नाविक का हाथ उसके कंधे में धँस गया।

राहुल दर्द से तड़प उठा। उसका शरीर जमने लगा, जैसे बर्फ बन गया हो। कियारा ने चीखते हुए उसका हाथ पकड़ने की कोशिश की लेकिन राहुल की आँखें सफ़ेद हो गईं और उसका शरीर पानी में लटक गया।

वह वहीं डूब गया।

बाकी तीनों दोस्त हैरान और डरे हुए थे। वे जानते थे कि अब अगर वे देर करेंगे तो उनकी भी यही हालत होगी।

आरव ने तुरंत इशारा किया कि सबको ऊपर की ओर तैरना होगा। उसने अपनी पूरी ताक़त लगाकर चाकू से दरवाज़े को धकेला। बहुत ज़ोर लगाने के बाद दरवाज़ा आधा खुला और वे तीनों बाहर निकल गए।

जैसे ही वे जहाज़ से बाहर निकले, पूरा जहाज़ हिलने लगा। दरारों से अजीब नीली रोशनी निकल रही थी। मानो वह खज़ाना अब अपने रहस्य को हमेशा के लिए सील कर रहा हो।

तीनों जैसे-तैसे ऊपर सतह की ओर तैरने लगे। उनके दिलों में राहुल की याद और जहाज़ का डर दोनों बस गए थे।

सतह पर पहुँचते ही उन्होंने देखा कि आसमान अचानक बादलों से ढक गया है। लहरें तेज़ हो रही थीं। ऐसा लग रहा था मानो समुद्र खुद गुस्से में हो।

कियारा रोते हुए बोली –
“हमने राहुल को खो दिया… ये सब हमारी गलती है।”

समीर ने गुस्से में कहा –
“मैंने पहले ही कहा था कि उस खज़ाने से दूर रहो… लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है।”

आरव चुप था। उसकी आँखों में डर और पछतावा दोनों थे। लेकिन उसे पता था कि कहानी यहीं खत्म नहीं होगी।

क्योंकि जहाज़ से निकलते समय उसने साफ़ देखा था — राहुल की आत्मा भी उन नाविकों के बीच खड़ी थी।

भाग 3 : आख़िरी संघर्ष

समुद्र की लहरें अब बेकाबू हो रही थीं। ऊपर आसमान काला पड़ चुका था, मानो रात अचानक दिन में उतर आई हो। आरव, कियारा और समीर नाव तक पहुँचे और हाँफते हुए उस पर चढ़ गए। तीनों के चेहरों पर डर, थकान और ग़म का अक्स साफ़ था।

कुछ देर तक सब चुप रहे। नाव पर बैठकर वे बार-बार उसी दिशा को देखने लगे जहाँ जहाज़ समुद्र की गहराई में था। लहरों के बीच से बुलबुले उठ रहे थे, जैसे समुद्र अब भी क्रोधित हो।

कियारा की आँखों से आँसू बह निकले।
“राहुल… उसे हम कभी वापस नहीं ला पाएंगे,” उसने टूटी हुई आवाज़ में कहा।

आरव ने उसके कंधे पर हाथ रखा और गंभीर स्वर में बोला –
“राहुल चला गया, लेकिन मुझे यक़ीन है… उसने हमें चेतावनी दी है। वह भी अब उसी श्राप का हिस्सा बन चुका है।”

समीर ने सिर झुकाते हुए कहा –
“वह जहाज़ सिर्फ़ लकड़ी और लोहे का ढांचा नहीं था। वह एक कैदखाना है – आत्माओं का। और वह खज़ाना… वही उस कैद की जड़ है।”

रात भर तीनों उस नाव पर बैठे रहे। समुद्र धीरे-धीरे शांत हो गया लेकिन उनके दिलों का तूफ़ान नहीं थमा।


सुबह का सच

सुबह होते ही वे तट पर लौट आए। वहाँ पहुँचकर उन्होंने अपने गाइड को सबकुछ बताया। गाइड का चेहरा डर से सफेद पड़ गया।

वह बोला –
“तुम लोगों ने बहुत बड़ी गलती कर दी। वह जहाज़ 300 साल पहले डूबा था। यह जहाज़ ‘एल डोराडो’ नाम का था, जिसे स्पेनिश समुद्री लुटेरे सोने-चाँदी लूटकर ले जा रहे थे। लेकिन कहते हैं, उस खज़ाने को एक तांत्रिक ने श्राप दिया था कि जो भी इसे चुराएगा, उसकी आत्मा कभी शांति नहीं पाएगी। जहाज़ तूफ़ान में डूब गया और उसके सारे नाविक उसी श्राप के शिकार हो गए। तब से हर वो इंसान जो उस खज़ाने को छूता है… वो भी उन्हीं में शामिल हो जाता है।”

कियारा और समीर का शरीर काँप उठा।
“तो… राहुल की आत्मा…?” कियारा ने धीमे स्वर में पूछा।

गाइड ने सिर हिलाया –
“हाँ, अब वह भी उसी जहाज़ का हिस्सा बन चुका है। वहाँ से कोई लौट नहीं सकता… जब तक कि खज़ाने को हमेशा के लिए उसी गहराई में सील न कर दिया जाए।”

आरव ने गहरी सांस ली।
“मतलब हमें वापस जाना होगा।”

समीर और कियारा ने उसे देखा, जैसे वह पागल हो गया हो।
“क्या तुम फिर से वहाँ जाना चाहते हो?” समीर चिल्लाया।
आरव ने दृढ़ता से कहा –
“हाँ। अगर हम नहीं गए तो वो श्राप कभी खत्म नहीं होगा। राहुल की आत्मा भी वहीं भटकती रहेगी। हमें उसे मुक्ति दिलानी होगी।”


आख़िरी गोता

अगले दिन वे फिर उसी स्थान पर लौटे। इस बार उनके दिल में खौफ़ से ज्यादा हिम्मत थी। तीनों ने कसम खाई कि चाहे जान चली जाए, पर जहाज़ का खज़ाना वापस वहीं छोड़ आएँगे।

उन्होंने फिर से स्कूबा गियर पहना और समुद्र की गहराई में उतर गए।

जहाज़ अब और भी भयावह लग रहा था। जैसे वह जानता हो कि उसके कैदखाने में घुसपैठिए वापस आ गए हैं।

जैसे ही वे अंदर पहुँचे, उन्हें फिर वही परछाइयाँ दिखाई दीं। नाविकों की आत्माएँ दीवारों से बाहर निकल रही थीं। और उनके बीच – राहुल भी खड़ा था। उसकी आँखें अब लाल थीं लेकिन चेहरा पहचानने लायक था।

कियारा ने आँसू रोकते हुए उसकी ओर हाथ बढ़ाया।
“राहुल… हम तुम्हें छुड़ाने आए हैं।”

लेकिन राहुल सिर्फ़ एक ठंडी मुस्कान देकर पीछे हट गया।

आरव ने तुरंत संदूक की ओर इशारा किया। “यही सबकी जड़ है। इसे यहीं छोड़ना होगा।”

उन्होंने मिलकर संदूक को उठाने की कोशिश की। जैसे ही उन्होंने उसे जहाज़ के सबसे गहरे हिस्से में धकेलना चाहा, आत्माएँ चीखने लगीं। पूरा जहाज़ हिलने लगा।

राहुल की आत्मा अचानक उन पर टूट पड़ी। उसने आरव का हाथ पकड़ लिया। उसका शरीर बर्फ जैसा ठंडा हो गया। आरव की सांसें धीमी होने लगीं।

समीर ने पूरी ताक़त से संदूक को धक्का दिया और जहाज़ के तल में बने एक गहरे गड्ढे में फेंक दिया।

जैसे ही संदूक वहाँ गिरा, एक तेज़ नीली रोशनी पूरे जहाज़ में फैल गई। आत्माएँ चीखने लगीं और धीरे-धीरे धुंध में बदलकर गायब होने लगीं।

राहुल की आत्मा भी धीरे-धीरे शांत हो गई। उसने एक बार कियारा की ओर देखा, आँखों में आँसू और राहत थी। फिर वह रोशनी में घुल गया।

जहाज़ जोरदार धमाके के साथ हिलने लगा। लगता था वह अब हमेशा के लिए समुद्र में समा जाएगा।

तीनों ने तेजी से बाहर निकलने की कोशिश की। जहाज़ उनके पीछे-पीछे धंसता जा रहा था।

कठिनाई से तैरते हुए वे सतह तक पहुँचे। ऊपर पहुँचते ही उन्होंने देखा – जहाज़ अब पूरी तरह समुद्र की गहराई में दफन हो चुका था।


अंत

तीनों दोस्त तट पर लौट आए। उनके चेहरे पर ग़म था लेकिन साथ ही संतोष भी। उन्होंने राहुल को खो दिया था, लेकिन उसे आत्माओं के उस श्राप से मुक्ति मिल गई थी।

आरव ने आसमान की ओर देखा और धीरे से कहा –
“अब वह आज़ाद है…”

कियारा और समीर ने सिर झुका लिया।
समुद्र अब शांत था। लहरें धीमी थीं, मानो उसने भी अपनी भूखी आत्माओं को हमेशा के लिए सुला दिया हो।

“डूबा हुआ जहाज़” अब सिर्फ़ एक कहानी बन गया था। लेकिन उन दोस्तों के दिल में वह हमेशा जीवित रहेगा।


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