भूतहा हवेली – दूसरा भाग (आत्मा का श्राप) The Haunted Mansion – Part 2 (The Curse of the Soul)


भूतहा हवेली – दूसरा भाग (आत्मा का श्राप) The Haunted Mansion – Part 2 (The Curse of the Soul)

शुरुवात से अंत तक जरूर पढ़ें।


आदित्य कई दिनों तक बेहोशी में रहा। उसकी आँखें खोखली हो गई थीं और वह रात में नींद में चीख उठता। गाँव वालों ने कई तांत्रिकों को बुलाया, मगर किसी ने कुछ नहीं कर पाया। जब आदित्य होश में आया, तो उसने कहा –
“वह औरत… उसने मुझे बुलाया है। उसका श्राप अभी खत्म नहीं हुआ है। अगर मैं वापस नहीं गया, तो वह मुझे कभी चैन से जीने नहीं देगी।”

गाँव वाले डर गए, पर आदित्य ने कसम खाई कि वह हवेली की आत्मा को मुक्त करके ही रहेगा।


तांत्रिक की चेतावनी

आदित्य पास के एक काले जादू के ज्ञानी तांत्रिक, बाबा रुद्रनाथ, के पास पहुँचा। बाबा ने आदित्य की आँखों में झाँकते ही कहा –
“तुमने उसकी परछाई देख ली है। अब वह तुम्हारे पीछे है। उस आत्मा को शांति दिलाना आसान नहीं, क्योंकि उसने मरते समय खून का बदला लेने की कसम खाई थी। उसके पति ठाकुर ने उसे ज़िंदा जला दिया था। तब से उसकी आत्मा हवेली में फँसी है।”

बाबा ने उसे एक काले धागे का ताबीज, गंगाजल और एक मंत्र दिया –
“अगर आत्मा का सामना करना है, तो रात के तीसरे प्रहर में हवेली के तहखाने में यह मंत्र बोलना। लेकिन सावधान – अगर तुम्हारा मन डोल गया, तो वह तुम्हारी आत्मा को भी निगल जाएगी।”


हवेली की वापसी

अगली रात आदित्य लालटेन, गंगाजल और बाबा का ताबीज लेकर हवेली पहुँचा। हवेली पहले से भी ज्यादा डरावनी लग रही थी। जैसे ही उसने अंदर कदम रखा, दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया।

सारे कमरे में अजीब सी फुसफुसाहट थी –
“तुम फिर लौट आए?”

हवेली की दीवारों से खून रिसने लगा। अचानक दीवार पर एक हाथ उभरा – काला और लंबी नुकीली उंगलियों वाला। आदित्य काँप गया, लेकिन आगे बढ़ा।


तहखाने का आतंक

तहखाने में पहुँचते ही उसने देखा कि वही सफेद साड़ी वाली औरत हवा में तैर रही थी। उसके लंबे बाल साँपों की तरह लहरा रहे थे। उसकी आँखों से खून बह रहा था और मुँह से धुआँ निकल रहा था। उसने चीखते हुए कहा –
“क्यों आए हो मेरे पास? तुम्हें मौत चाहिए?”

आदित्य ने काँपते हुए बाबा का मंत्र पढ़ना शुरू किया।
“ॐ नमः कालरात्र्यै…ॐ नमः कालरात्र्यै…”

अचानक हवेली का फर्श हिलने लगा। औरत की चीखें इतनी भयानक थीं कि कान फट जाएँ। उसने अपने हाथ हवा में घुमाए और अचानक आदित्य के चारों ओर एक काला धुंधला घेरा बन गया।


आत्मा का रहस्य खुलना

तभी आदित्य ने ज़मीन पर पड़े पुराने खंजर को देखा – वही खंजर जिससे ठाकुर ने उसकी पत्नी की हत्या की थी। आदित्य ने खंजर उठाया और गंगाजल छिड़कते हुए कहा –
“तुम निर्दोष हो, मैं तुम्हें शांति दूँगा!”

औरत की आँखों में आँसू आ गए। उसने काँपते हुए कहा –
“मेरी राख आँगन में दफ़न है। उसे गंगाजल से मुक्त कर दो, तभी मैं जा सकूँगी।”


अंतिम मुक्ति या विनाश?

आदित्य ने हवेली के आँगन में खुदाई की। जैसे ही उसने राख पर गंगाजल डाला, हवेली में भयंकर चीख गूँज उठी। हवा तेज़ हो गई। अचानक औरत का चेहरा शांत हो गया और उसने मुस्कुराते हुए कहा –
“अब मैं आज़ाद हूँ…”

लेकिन जैसे ही वह आत्मा धुएँ में बदलकर आसमान में गई, हवेली की दीवारें गिरने लगीं। आदित्य किसी तरह भागा।


अगली सुबह हवेली का एक भी पत्थर वहाँ नहीं था। लोग कहते हैं कि हवेली खुद धूल में मिल गई।

लेकिन…
कई साल बाद जब गाँव में कोई नया यात्री आता है, तो वह कहता है कि आधी रात में उसे वही सफेद साड़ी वाली औरत रास्ते में खड़ी दिखाई देती है, और फुसफुसाती है –
“क्या तुम भी हवेली में चलोगे?”


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